गले के रोग और उनका घरेलू इलाज Gale ke rog aur unka gharelu ilaz - Swasthya Tips
गले में कुछ महसूस होना, गले में इन्फेक्शन के घरेलू उपाय, गले की तकलीफों का घरेलू इलाज, गले के रोग और उनका घरेलू इलाज Gale ke rog aur unka gharelu ilaz, Swasthya Tips गले में इंफैक्शन होने पर तुरंत करें ये देसी उपाय, इंफैक्शन गले में चुंभन-सूजन, खराश, कर्कश भरी आवाज, हल्की खांसी के साथ दर्द व खाने की परेशानी का इलाज Khansi gale ki, gale ke rog, gale ki bimari, galaa kharab hone par kya karen, gale ki bimariyon ka deshi gharelu ilaz.
गले में काफी प्रकार की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। जैसे :- गले का बैठ जाना , गले का दर्द , खांसी , गले की सूजन आदि कई कारण हो सकतें है। जो हमे काफी पीड़ा पहुंचाते हैं। आज हम आपको गले की कई प्रकार दिक्कतों से छुटकारा पाने के कुछ आसान और सरल तरीके बता रहें जो हमारे ज्ञान गुरु जी से जाने हैं।
गले में काफी प्रकार की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। जैसे :- गले का बैठ जाना , गले का दर्द , खांसी , गले की सूजन आदि कई कारण हो सकतें है। जो हमे काफी पीड़ा पहुंचाते हैं। आज हम आपको गले की कई प्रकार दिक्कतों से छुटकारा पाने के कुछ आसान और सरल तरीके बता रहें जो हमारे ज्ञान गुरु जी से जाने हैं।

बैठा हुआ गला :-
अकरकरा, कुलजन और मुलहठी के टुकड़े सुपारी की तरह मुंह में रखने से बैठा हुआ गला खुल जाता है।
गला गंभीर रूप से बैठ गया हो तो प्याज का रस शहद के साथ ले। एक-दो दिन में गला सही हो जायेगा और आवाज में मधुरता आएगी।
आंवले का चूर्ण गाय के दूध (ताजा) के साथ सेवन करने से बैठा गला ठीक हो जाता है। गन्ना भूनकर चूसने से बैठा हुआ गाला खुल जाता है।
कंठमाला के निदान में हल्दी बहुत उपयोगी है। हल्दी की बड़ी सी गांठ लेकर उसे सिल पर चन्दन की तरह घिस ले.इसका आधा हिस्सा तो गले पर लेप की तरह लगा ले, शेष आधा हिस्से को २५०-३०० मिली. पानी में अच्छी तरह से गर्म कर ले और कुनकुना होने तक खूब फेंट ले, फिर इससे गहराई तक गरारे करे। १-१ गरारे को देर तक मुह चलाने के बाद ही थूके। इस कुनकुने पानी से गले के लेप को थपथपाते रहे। लेप लगाने और गरारे करने की क्रिया हर रोग सुबह शाम करे। २-४ दिन में कंठमाला से या बिठा गला से मुक्ति मिल जाएगी।
यदि सर्दी जुखाम के कारण गला बैठ जाये तो एक गिलास पानी में चुटकी भर हल्दी डालकर पानी को उबाले जब पानी हल्का गर्म हो जाये तो गरारे करने से लाभ होगा।
अंडूसे के पत्तो का काढ़ा शहद के साथ पीने से बिठा गला खुल जाता है।
गले और आवाज को सामान्य बंनाने के लिए प्याज के रस का सेवन बहुत लाभकारी है। प्याज का रस सादे पानी में मिलाये और पी जाये । २-३ खुराक ही गले को सामान्य बना देती है।
गले की खांसी :-
खांसी कैसी भी हो, सुखी या बलगम वाली खाँसी खत्म करने के लिए हल्दी का उपचार बहुत गुकारी है। इस उपचार में किसी तामझाम की जरुरत नहीं हल्दी का उपचार खांसी में भी गुणकारी है। बस, हल्दी की गांठ के कुछ टुकड़े चाकू से काटकर जेब में रख ले। जब भी खांसी ए, हल्दी का एक टुकड़ा मुह में रखकर चूसे। दिन में ४-५ टुकड़े तो चूस ही ले। एक या दो दिन में सुखी अथवा बलगम वाली खांसी से छुटकारा मिल जायेगा।
उपला जलकर उसपर चम्मच पर हल्दी का चूर्ण छिड़ककर उसके धुएं को नक् से खीचना चाहिए इससे बलगम पतला होकर नाक के रास्ते से निकल जायेगा और मरीज को खांसी से रहत मिलेगी ये उपचार कुछ दिन तक रोज शाम तक करने से काली खांसी ठीक हो जाती है।
आधा लीटर पानी में चुटकी भर नमक डालकर उबले जब पानी उबाल जाये तो कुनकुना होने दे फिर गरारे करे गला खुलेगा और बिठा गाला ठीक हो जायेगा। यदि आधी चुटकी फिटकरी भी इस पानी में दाल दी जाये तो खली खांसी में बहुत जल्दी फायदा होगा और जल्दी ही काली खांसी में आराम मिल जायेगा ।
काली खांसी से निदान पाने के लिए हल्दी की एक गांठ भून ले और इसकी चने के दाल जितनी मात्रा दिन में ४-५ बार शहद के साथ ले सितोपलादि चूर्ण का सेवन भी काली खासी में फायदेमंद होते है।
गले की खराश या गले के दर्द से छुटकारा पाने के लिए गेराज करे. गरम पानी में निम्बू का रस निचोड़कर हर रोज गरारे करे। यह उपचार लगातार कुछ दिन तक करने से गले की खराश से छुटकारा मिलेगा ही, गले के दूसरे रोग भी ठीक हो जायेगे।
टॉन्सिल के मरीज :-
टॉन्सिल के मरीज को अनन्नास खिलाना लाभकारी होता है। अनन्नास के टुकड़े पर निम्बू का रस निचोड़कर खाइये, टॉन्सिल का रोग जाता रहेगा।
टॉन्सिल्स से परेशान इंसान हल्दी की २५ ग्राम की गांठ पीस ले और उसे ५० ग्राम सरसो के तेल में भून ले। फिर इस तेल में मिली गांठ को फाहे पर रख कर टॉन्सिल्स पर रख दे। २-४ दिन की क्रिया के बाद टॉन्सिल्स का प्रकोप ठीक हो जाता है।
दारुहल्दी , गिलोय, चमेली के पत्ते, अजवाइन, त्रिफला का काढ़ा बनाकर (बराबर अनुपात में ) गरारे करने से मुंह से संबंधी सभी रोग ख़त्म हो जाते है।
कच्चे पपीते का दूध टॉन्सिल से राखत दिलाता है। यह दूध पानी में मिलाये और सुबह उठाते ही बच्चे गरारे कराये, दूसरी बार रात को सोने से पहले इसे रोज का निययं बनाये। धीरे-धीरे टॉन्सिल का रोग ठीक हो जायेगा।
अदरक की गांठ में छेंद करके उसमे थोड़ा सा नमक और भुनी हुई हींग भरकर आग में भून ले इसे पीसकर छोटी छोटी गोली बना ले और चूसे गले के बहुत से रोग ठीक कर देगा ये नुस्खा।
अगर घर में किसी छोटे बच्चे को गले की बीमारी है तो निम्बू का रस पानी में मिलाकर बच्चे को गरारे करवाये.दिन में ३-४ बार यह उपचार करने से २-३ दिन में मुह के टॉन्सिलिस का घाव ठीक हो जायेगा साथ ही डिफ्थीरिया जड़ से खत्म हो जायेगा। बिना नमक मिलाये निम्बू की फांक भी चूसने को दे, इससे गले के विकारर से बच्चा जल्दी ही छुटकारा पा जायेगा। वैसे निम्बू का रस आमतौर पर नहीं लिया जाता है, क्योकि इसमें अम्लीय तत्व होते है और नमक इसकी दाहक शाक्ति पर अंकुस लगता है, लेकिन डिफ्थीरिया के रोगी के गले में घाव होने की सम्भावना सबसे ज्यादा होती है। अतः उसे नमक से बचना चाहिए, क्योकि घाव के लिए नमक बहुत ज्यादा नुकसान करता है।
गले का दर्द :-
सोंठ, मिर्च, पीपल, हरड़, बहेड़ा, आंवला और जवाखार चूर्ण थोड़ा-थोड़ा मुंह में डालते रहने से भी गले का दर्द ठीक हो जाता है।
अनार काली, सुख धनिया पोस्त व शहतूत के हरे पत्ते मसूर की दाल छह-छह माशे लेकर एक सेर पानी में काढ़ा बनाये। इसका कुल्ला करने से गले की सूजन और दर्द ठीक हो जाता है।
एक गिलास पानी में एक चम्मच अजवाइन डालकर इतना उबाले की लगभग पानी आधा रह जाये इस पानी से गरारे करने से गले की सूजन ठीक हो जाती है साथ ही गले का दर्द भी ठीक हो जाता है।
मुलहठी का चूर्ण करने से गले दर्द व सूजन बहुत ज्यादा फायदा होता है।
गले में दर्द खराश या चुभन महसूस हो खाने का नमक, खाने का सोडा, पिसी हल्दी आधा आधा चम्मच चावल बराबर पीसी हुई फिटकरी को एक गिलास हलके गरम पानी में घोलकर सुबह उठाने व दोनों समय सुबह शाम खाने के बाद व रात को सोने से पहले गरारे करने से दो दिन में ही गले की खाश, चुभन, दर्द से रहत या आराम मिल जायेगा।
एक गिलास कुनकुना पानी मैं निम्बू निचोड़े और उसमे नमक मिलाकर उस पानी से गले के अंदर तक सुबह थोड़ी थोड़ी देर के बाद 3 - 4 बार गरारे करे 1 -2 दिन में गला ठीक हो जायगा और गले के रोग व सूजन भी ठीक हो जाएगी ।
निम्बू के रस में थोड़ी सी रसौत मिलाकर घोल बना ले। अब इस घोल को उंगली से जीभ और गले के अंदर तक मॉल दे। जहा तक मुमकुन हो, लार न टपकने दे। कुछ देर तक घोल को दानो में लगा रहने दे, फिर लार टपकने दे, कुल्ला न करे। दिन में ३-४ बार ये क्रिया दोहराये। रसौत का करीलापन जरूर अरुचिकर लगेगा, लेकिन यही कसैलापन निम्बू के साथ मिलकर गले के घाव, दर्द, खराश, गला बैठने जैसे अन्य रोग पर अमृत की तरह काम करेगा.१-२ दिन तक इस घोल का लेप करने से गले व जीभ के दाने जाते रहेगे। सूजन और लाली गायब हो जाएगी, जो भी खायेगे-पियेंगे वो बिना दर्द किया गले के नीचे आसानी से उतर जाएगी।
शहद गले की सूजन को ख़तम कर देता है। एक दिन में 6 बार एक - एक चम्मच शहद लेते रहे। दो दिन में गले का दर्द, लाली और सूजन का नामोनिशान नहीं रहेगा। अगर मुह में छाले पड़े गए है हो तो छालो का भी जड़ से ख़त्म कर देगा ये नुस्खा।
शहद गले के रोग में अचूक दवा है। एक गिलास गरम पानी में दो चम्मच
शहद घोल ले, फिर घुट लेकर धीरे-धीरे पिए, गले को बहुत राहत मिलेगी। सुबह शाम १-१ घंटे के अंतर में दो बार शहद शहद मिले गर्म पानी के गरम घुट ले, गला एक दम ठीक हो जायेगा।
गले में खराश की वजह से खिचखिच है तो घी में भुना हुआ प्याज खाये। भुने प्याज का काढ़ा पीने से खराश नष्ट होती है।
गले के अंदर दाने या घाव को ठीक करने के लिए प्याज के रस को निम्बू के रस के साथ पिए। चाहे तो प्याज के अचार का एक चम्मच सिरका भी पी सकते है।
गले की जलन का इलाज प्याज के टुकड़े दही व मिश्री के साथ खाने से हो जाता है। दही व मिश्री के घोल में पड़े प्याज के टुकड़े खाने से गले की सूजन व काँटों की चुभन भी जाती रहेगी।
प्याज कंठमाला के रोग को ठीक कर देता है। प्याज को पीसकर इसका गले पर लेप कर दे. कुछ दिन तक नियमित रूप से लेप करे. लेप हर रोज रात को सोने से पहले करना चाहिए. सुबह उठकर इसे धो ले. दिन में २-३ बार प्याज के रस से गले पर मालिश भी कर दे. ७-८ दिन तक इस विधि से इलाज जारी रखे, गले की गिल्टियां बिठा जाएगी और गला सामान्य हो जायेगा।
अगर गाला, जीभ अथवा तालु पाक जाये तो प्याज के रस मिले पानी से गले की तह तक गरारे धीरे धीरे करे और पानी को जीभ व तालु तक अच्छी तरह घुमाये। इस विधि से हर रोज सुबह गरारे करने से २-३ दिन में गले, जीभ व तालू का पकना थम जायेगा।
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